असम की अदालत ने 1995 में जादू-टोने से जुड़ी हत्या के मामले में छह लोगों को उम्रकैद की सज़ा सुनाई।
असम की एक अदालत ने जादू-टोना करने के शक में तीन दशक से भी पहले एक बुजुर्ग महिला की हत्या के मामले में छह लोगों को उम्रकैद की सज़ा सुनाई है। रंगिया की एडिशनल सेशंस और डिस्ट्रिक्ट जज की अदालत ने बुधवार को कामरूप ज़िले के बोरडांगेरीकुची गाँव की रहने वाली 80 वर्षीय मारिया बोरो के मामले में यह फ़ैसला सुनाया।

असम की एक अदालत ने तीन दशक से भी पहले जादू-टोना करने के शक में एक बुजुर्ग महिला की हत्या के मामले में छह लोगों को उम्रकैद की सज़ा सुनाई है।
रंगिया के एडिशनल सेशन और डिस्ट्रिक्ट जज की अदालत ने बुधवार को कामरूप ज़िले के बोरडांगेरीकुची गाँव की रहने वाली 80 वर्षीय मारिया बोरो के मामले में यह फ़ैसला सुनाया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 1995 में स्थानीय लोगों ने बोरो को डायन करार देकर उन पर हमला किया था। इसके बाद उनके शव को जला दिया गया था।
छह दोषी—सोनेश्वर बोरो, जंगल बोरो, सूरज बोरो, कंडुरा बोरो, हरेश्वर बोरो और धनला बोरो—सभी बैहाटा चारियाली पुलिस स्टेशन इलाके के रहने वाले थे।
अदालत ने उन्हें भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं 147, 148, 149, 302, 448 और 201 के तहत दोषी पाया और उम्रकैद की सज़ा सुनाई।
यह मामला सालों तक लंबित रहा और अंतिम फ़ैसले तक इसकी सुनवाई तीन दशकों से ज़्यादा समय तक चली।
बुधवार का फ़ैसला एक ऐसे मामले के लंबे अध्याय को बंद करता है जो असम के कुछ हिस्सों में अंधविश्वास से जुड़ी हिंसा की लगातार बनी हुई समस्या को उजागर करता है।
इतिहास में जादू-टोना से जुड़े हमलों में कमज़ोर लोगों, खासकर ग्रामीण समुदायों की बुजुर्ग महिलाओं को निशाना बनाया गया है।
अधिकारियों और सामाजिक संगठनों ने ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ज़्यादा जागरूकता और सख़्त कार्रवाई की बार-बार मांग की है।
दोषसिद्धि यह रेखांकित करती है कि न्याय प्रणाली जवाबदेही तय करने की दिशा में काम करती रहती है, भले ही मामलों को नतीजे तक पहुँचने में दशकों लग जाएँ।
फ़ैसले की शुरुआती रिपोर्ट में आगे की अपील या मुआवज़े के निर्देशों के बारे में तुरंत कोई जानकारी नहीं दी गई थी।
यह फ़ैसला निराधार मान्यताओं पर आधारित आरोपों की मानवीय कीमत और उनसे निपटने में उचित कानूनी प्रक्रिया के महत्व की याद दिलाता है।
शुरुआती जाँच के दौरान पुलिस रिकॉर्ड अभियोजन पक्ष के मामले का आधार बने, जिसके कारण अंततः उम्रकैद की सज़ा हुई।
आने वाले दिनों में अदालत के पूरे आदेश की आधिकारिक पुष्टि होने की उम्मीद है।
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